शनिवार, 3 जून 2017

सीटू स्थापना दिवस



ट्रान्सफर के मुद्दे पर सीटू का प्रदर्शन
हिंदुस्तान स्टील एम्प्लोइज यूनियन सीटू ने आज बोरिया गेट पर ट्रान्सफर के विरोध में प्रदर्शन किया जिसमे सैकड़ों कर्मियों ने भाग लिया | भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा एकतरफा फैसले से किये जा रहे ट्रान्सफर को सीटू नेताओं ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 9A सपठित अनुसूची 4  का खुला उल्लंघन बताते हुए  बताया कि यह कदम घोर संयंत्र विरोधी और कर्मचारी विरोधी है जिसका दुष्प्रभाव संयंत्र के साथ साथ कर्मियों के मनोबल पर भी पड़ेगा |

ज्ञापन सौंपकर जलकर का किया विरोध
ट्रान्सफर नीति तथा सयंत्र प्रबंधन द्वारा कर्मियों के आवास पर जल कर लगाए जाने का विरोध करते हुए सीटू ने प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा |

सीटू स्थापना दिवस पर रायपुर में कार्यक्रम
प्रदर्शन के बाद भिलाई से सीटू के सैकड़ों कार्यकर्ता रायपुर के लिए रवाना हुए | सीटू के स्थापना दिवस के अवसर पर बूढा तालाब रायपुर में राज्य स्तरीय जनसभा का आयोजन किया गया जिसमे राज्य के कोने कोने से आये सैकड़ों सीटू प्रतिनिधियों ने भाग लिया | 
 




















गुरुवार, 11 मई 2017

सीटू का राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर : BTR भवन दिल्ली




सीटू का राष्ट्रीय शिविर सम्पन्न
सीटू का 3 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर नई दिल्ली स्थित सीटू कार्यालय बी.टी. आर भवन में आयोजित किया गया था जो बुधवार को संपन्न हुआ । प्रशिक्षण शिविर के अंतिम सत्र में संगठन पर चर्चा की गयी । चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष गौर किया गया कि इस्पात, कोयला, परिवहन, मजदूर, जैसे हर उद्योग  और आंगनबाड़ी ,मध्यान भोजन, मनरेगा, जैसे हर क्षेत्र में सीटू द्वारा कर्मचारियों के हित में अनेकों संघर्ष स्वतंत्र और संयुक्त रुप से किए गए किंतु उन संघर्षों को पूरी तरह संगठन में तब्दील नहीं किया जा सका ।
संघर्षों को संगठन में बदलने का आह्वान
सीटू के इस 3 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के अंत में संघर्षों को संगठन में तब्दील करने का आव्हान किया गया | इसके अलावा राजनीतिक अर्थशास्त्र, सांप्रदायिकता के खतरे, भूमंडलीकरण का मजदूरों पर असर, महिलाओं को संगठन में जोड़ने पर विशेष जोर आदि पर भी चर्चा हुई । राजनीतिक अर्थशास्त्र पर का. तपन सेन, सांप्रदायिकता के खतरे पर का. जे.एस. मजूमदार, मजदूर आंदोलन का इतिहास पर कामरेड स्वदेश देवराय,जनवादी कार्यप्रणाली पर कामरेड हेमलता, कामरेड कश्मीर सिंह ठाकुर ने अपना व्याख्यान दिया।
छत्तीसगढ़ से तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल
इस आयोजन में पूरे देश से विभिन्न राज्यों से आये प्रतिनिधियों ने भाग लिया | छत्तीसगढ़ राज्य से तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने इस राष्ट्रिय शिविर में भाग लिया  | तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मे सीटू की छत्तीसगढ़ राज्यसमिति के कार्यकारी अध्यक्ष एसपी डे, सचिव धर्मराज महापात्रा तथा अंजना बाबर शामिल थे ।




सोमवार, 1 मई 2017

मई दिवस 2017

मई दिवस को बंद अवकाश घोषित करे – रविशंकर
सीटू के संगठन सचिव श्री श्री रविशंकर ने बताया कि आज मई को मई दिवस के उपलक्ष्य में सीटू कार्यालय में सुबह 7:45 बजे तथा 8:30 बजे बोरिया गेट पर ध्वजारोहण किया गया | इसके बाद सीटू की विभागीय समितियों के सदस्यों ने सभी विभागों में घूम घूम कर श्रमिक साथियों को बधाई देते हुए मई दिवस को बंद अवकाश घोषित करने की मांग के अपने संकल्प को सभी तक पहुंचाया ज्ञातव्य हो कि देश के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, पंजाब, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, केरल,तमिलनाडु, गोवा  सहित  लगभग 10 राज्यों में मई दिवस को बंद अवकाश घोषित है | सीटू ने मांग की कि छत्तीसगढ़ शासन को भी मई दिवस को बंद अवकाश घोषित करना चाहिए ताकि भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन भी इसे बंद अवकाश घोषित कर सके |
आठ घंटे काम और साप्ताहिक अवकाश मिला  – रेड्डी
सीटू महासचिव डी.वी.एस.रेड्डी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस अर्थात् मई दिवस (May Day) 1886 में शिकागो में आरंभ हुआ। श्रमिक मांग कर रहे थे कि काम की अवधि आठ घंटे हो और सप्ताह में एक दिन का अवकाश हो। इस दिन श्रमिक हड़ताल पर थे। इस हड़ताल के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने बम फोड़ दिया तत्पश्चात् पुलिस गोलाबारी में कुछ मजदूर मारे गएसाथ ही कुछ पुलिस अफसर भी मारे गए।

1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इसको अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए
उसी समय से विश्व भर के 105 देशों में 'मई दिवसको राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता प्रदान की।

भारत में मई दिवस 1923 में मनाया गया – टी.जोगाराव
सीटू के संगठन सचिव श्री टी.जोगाराव ने बताया कि भारत में मई दिवस पहली बार वर्ष 1923 में मनाया गया जिसका सुझाव सिंगारवेलु चेट्टियार नामक कम्यूनिस्ट नेता ने दिया. उनका कहना था कि दुनियां भर के मजदूर इस दिन को मनाते हैं तो भारत में भी इसको मान्यता दी जानी चाहिए। मद्रास में मई दिवस मनाने की अपील की गई। इस अवसर पर वहां कई जनसभाएं और जुलूस आयोजित कर मजदूरों के हितों के प्रति सभी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।













शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

“निजीकरण का विरोध क्यों ?” पुस्तिका विमोचित

सीटू ने दी बाबा साहब को श्रद्धांजलि – धनराज इलमकर
सीटू कार्यालय सेक्टर 4 में आज बाबा साहब भीम राव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी गयी | कार्यक्रम में एस.पी.डे , एम्.एस.शांतकुमार, रुखम सिंह तारम, वेणुगोपाल, रविशंकर, टी.जोगाराव, सविता कुमारी,एस.एस.के.पनिकर, अनिल शेखर, अली अकबर, धनराज इलमकर, केवेंद्र सुन्दर, डी.आर.साहू, आर.के.हिरवानी, माल्कोंडाया, गुमान सिंह, .ए.पी.पटेल आदि  मौजूद रहे | 
“निजीकरण का विरोध क्यों ?”  पुस्तिका विमोचित – टी .जोगाराव
सीटू के संगठन सचिव श्री टी.जोगाराव ने बताया कि इस अवसर पर स्टील वर्कर्स फेडरेशन के द्वारा प्रकाशित तथा राष्ट्रिय महासचिव पी.के.दास द्वारा रचित पुस्तिका  “निजीकरण का विरोध क्यों ?”  का हिंदी संस्करण विमोचित किया गया | इस पुस्तिका में विस्तार से  निजीकरण से राष्ट्र को होने वाले नुक्सान के साथ सामाजिक तथा आर्थिक दुष्परिणामों पर सारगर्भित विवेचन किया गया है | श्री पी.के. दास लगभग आधे दशक से इस्पात उद्योग से जुडी समस्याओं को विभिन्न मंचों पर उठाते रहे हैं इसलिए उनकी पैनी नजर से निजीकरण का कोई भी दुष्प्रभाव बच नहीं पाया है | सभी लोगों को इस आँखे खोलने वाली पुस्तिका का अध्ययन करना चाहिए | यह पुस्तिका हिन्दुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन, सीटू, की वेब साईट  www.hseubhilai.blogspot.com पर उपलब्ध है |
नीति निदेशक सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई  – एस.पी.डे
संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाकर पिछले २० वर्षों से केन्द्र की सरकारें ऐसी नीतियां पूरे राष्ट्र पर थोप रहे हैं जो मुठ्ठी भर लोगों को देश के संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर अकूत धन कमाने की छूट दे रही है | इसके दूसरी ओर कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, ब्याज दरों में कटौती, औद्योगिक मंदी, कर्मचारियों के  अधिकार छीनने श्रम कानूनों में संशोधन,  हजारों कारखानों की तालाबंदी, करों, उपकारों, टोल करों में भारी वृद्धि, ठेकाकरण एवं आउटसोर्सिंग द्वारा  बड़े पैमाने पर स्थायी कर्मचारियों के बदले अत्यंत अल्प वेतन पर ठेका श्रमिकों की नियुक्ति, स्वास्थ्य सेवाओं  और शिक्षा की उच्च लागत, निर्बाध आयात, निर्यात में कमी , हमारे अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का  प्रवेश आदि ने  हमारे देश की अर्थव्यवस्था को पतन के कगार पर पहुंचा दिया है ।
सार्वजनिक क्षेत्र  के उपक्रमों को बेचना विशवासघात है – अनिल शेखर
पिछले 40 वर्षों में सरकार ने पीएसयू  में कुल 1,13,783 करोड़ रुपये का निवेश किया है जिसके बदले में पीएसयू से राष्ट्र को रु, 5,07,698 करोड़ प्राप्त हो चुके हैं तथा कुल 3,57,784 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं जिसे मिलाकर वर्ष 1991 से वर्ष 2013 तक  केवल 12 वर्शोन  में कुल रु  8, 65, 482 करोड़ का योगदान देश को हुआ है | 1991 से 2016 तक, 25 वर्षों में, कई लाभकारी सार्वजनिक उपक्रमों के बेचे जाने के बावजूद, राष्ट्र ने सार्वजनिक उपक्रमों से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया। अब, सरकार सभी सार्वजनिक उपक्रमों को विक्रय कर 90,000 रूपए प्राप्त करना चाहती हैं ।

एस.पी.डे