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मंगलवार, 4 सितंबर 2018

दिल्ली रैली

जनविरोधी राष्ट्  विरोधी  नीतियों के खिलाफ दिल्ली में होगा किसानों के साथ सीटू का प्रदर्शन
 सीटू के सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली रवाना
रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक 5  लाख लोग  करेंगे मार्च
वेतन समझौता पर रोक सहित सरकार की अन्य जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू द्वारा चलाए जा रहे हैं संघर्ष की श्रंखला की अगली कड़ी में 5 सितंबर को सीटू और किसान सभा  के लाख से ज्यादा लोग दिल्ली में राम लीला मैदान से  मार्च निकालकर संसद भवन के सामने प्रदर्शन करेंगे ।
निरंतर चल रहा है सीटू का संघर्ष ; 9 अगस्त को भिलाई में 238 लोगों ने दी थी गिरफ्तारी
सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू का संघर्ष निरंतर जारी है | अपने उद्योग और कर्मियों तथा आम जनता के हितों की रक्षा के लिए  सीटू द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है | स्थानीय स्तर पर कन्वेंशन, प्रदर्शन, परिवार सहित धरना, दिल्ली के जंतर मंतर पर एक दिवसीय धरना; 9,10 एवं 11 नवंबर 2017 को संसद के सामने महापड़ाव  का आयोजन,| 9 अगस्त 2018 को देशभर में सामूहिक गिरफ्तारी, स्वतंत्रता दिवस  की पूर्ण  रात्रि 14 अगस्त को सामूहिक जागरण के पश्चात अब 5 सितंबर को दिल्ली में किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन ।छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम दास जी टंडन के आकस्मिक निधन के कारण छत्तीसगढ़ में सामूहिक जागरण के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था | भिलाई में यह कार्यक्रम अब भगत सिंह जयन्ती के अवसर पर 28 सितम्बर  2018  को होगा |
नीतियों के आक्रमण और आम जनता के शोषण पर एक नजर
1.        इस्पात उद्योग पर संकट- लागत मूल्य से कम कीमत पर इस्पात का आयत, उच्च परिवहन शुल्क, उच्च बिजली दर, विभिन्न प्रकार के उपकर, भारत  में इस्पात की निम्न प्रति व्यक्ति खपत(62कि.ग्रा.प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ) के कारण इस्पात उद्योग संकट में है |
2.        वेतन समझौता में बाधा- प्रधानमंत्री कैबिनेट द्वारा DPE के माध्यम से जारी  सार्वजनिक उपक्रमों के  वेतन समझौता करने के जारी निर्देश
·        विगत 3 वर्षों में  लाभ अर्जित करना आवश्यक है ।
·        3 वर्षों के पश्चात समझौते की समीक्षा कर लाभ ना होने पर वेतन की वसूली (Recovery)
·        वेतन वृद्धि की अधिकतम सीमा विगत 3 वर्षों के औसत लाभ का 20% होगी ।
·        सेल पेंशन योजना पर 4 वर्ष पूर्व हुए समझौते को लागू करने के लिए लाभ कमाने की योजना प्रस्तुत करनी है।
3.                       दवाओं की मूल्य वृद्धि - सूचीबद्ध दवाओं को 140 से घटाकर 70 कर दवा निर्माताओं को  अकूत मुनाफा कमाने की छूट दी गयी । गैर सूचीबद्ध दवाओं में शामिल जीवन रक्षक दवाएं  मूल्य नियंत्रण से बाहर है।
4.                       योजना आयोग को भंग कर NITI आयोग का गठन- सरकार ने भारत रूपांतरण के नाम पर योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन किया और 74 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विनिवेशीकरण बेचने का निर्णय लिया । सेल की टाउनशिप तथा विशेष इस्पात संयंत्र के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू ।
5.                       PPP मॉडल एक साजिश- सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत सरकारी उपक्रमों सहित अस्पताल आदि में सरकार पूँजी   निवेश करके, प्रबंधन निजी हाथों को सौंप रही है ।
6.                       निजी मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति- सस्ती भूमि और रियायतें देकर नीति आयोग द्वारा निजी कारोबारियों को मेडिकल कॉलेज खोलने प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।
7.                       भारतीय चिकित्सा परिषद(MCI) के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का गठन प्रस्तावित है जिसका उद्देश्य जनता के स्वास्थ्य के लिए उचित चिकित्सा पद्धत्ति सुनिश्चित करने वाली इस संस्था में निजी कारोबारियों के चहेतों को नामित किया जा सके ।
8.                       भविष्य निधि भविष्य निधि के बाद अब ई.एस.आई. और श्रमिक कल्याण कोष को भी शेयर बाजार निवेश किया जाएगा
9.                       ठेका कर्मियों का अमानवीय शोषण- न्यूनतम  मजदूरी अधिनियम,  बोनस भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि कानून, साप्ताहिक अवकाश अधिनियम, समान कार्य के लिए समान वेतन  जैसे वर्तमान श्रम कानूनों  का सही अनुपालन नहीं होने से ठेका कर्मी पहले से ही अमानवीय शोषण के शिकार है। आउटसोर्सिंग के बाद अब वे ठेका कर्मी नहीं रह पाएंगे और सभी कानूनी अधिकारों से वंचित हो जाएंगे ।
10.                  Fixed term employment (निश्चित अवधि  रोजगार) – नियमित रोजगार को खत्म करने के लिए निश्चित अवधि रोजगार लाया जा रहा है ताकि पूर्व निर्धारित अवधि के पश्चात बिना किसी मुआवजे के नौकरी से हटाया जा सके ।
11.                  किसानों को नहीं मिल रहा अपनी उपज का समर्थन मूल्य - स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों को उनकी उपज के लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की चुनाव पूर्व घोषणा पर सरकार मौन है ।
12.                  बीमा आधारित योजनाएं- फसल बीमा योजना तथा स्वास्थ्य योजनाएं वास्तव में बीमा आधारित योजनाएं हैं जिससे निजी बीमा कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है और किसानों की आत्महत्या जा रही है
13.                  बैंक संकट- बड़े ऋणधारियों द्वारा ऋण नहीं चुकाने से बैंक कर्मियों का वेतन समझौता रुका | IDBI बैक के शेयर को LIC को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है |
14.                  नोटबन्दी कालेधन पर प्रहार के नाम पर की गयी नोट्बंदी वास्तव में आम जनता की रोजी-रोटी पर हमला था |यह बात हाल ही में जारी हुयी रेज़र्व बैंक की ताजा रिपोर्ट से स्पष्ट हो गयी |  
15.                  जीएसटीसरकार द्वारा जीएसटी के माध्यम से आम जनता पर कर का बोझ थोपने के उदाहरण है पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखकर एवं दवाओं को जीएसटी के दायरे में रखना |

नीतियों से पीड़ित समाज का हर तबका कर रहा है संघर्ष
उक्त नीतियां सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर लागू की जा रही जनविरोधी नीतियों मे से कुछ उदाहरण है जिससे समाज का हर तबका पीड़ित है। समाज के हर तबके की आजीविका पर नीतियों का हमला हो रहा है अपनी आजीविका बचाने के लिए किसान सफाई कर्मी शिक्षाकर्मी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा बहनों बैंक कर्मी BSNL के कर्मी ग्रामीण डाकघर में विभिन्न उद्योग के कर्मचारी परिवहन कर्मचारी यहां तक कि पुलिस कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को भी सड़क पर  उतरना पड़ रहा है ।

                                                जनहित में बनानी होगी नीतियाँ
बड़े कारपोरेटर घरानों को करों में दी गई छूट वापस ली जाए , बैंको में रखे जनता के पैसों की लूट पर रोक लगे, स्थायी कार्यों का ठेकाकरण बंद हो, समान  कार्य के लिए समान वेतन मिले, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले,सार्वजानिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगे, सभी नागरिको के लिए खाद्य सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा,पेयजल व आवास  सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाए |






शनिवार, 3 जून 2017

सीटू स्थापना दिवस



ट्रान्सफर के मुद्दे पर सीटू का प्रदर्शन
हिंदुस्तान स्टील एम्प्लोइज यूनियन सीटू ने आज बोरिया गेट पर ट्रान्सफर के विरोध में प्रदर्शन किया जिसमे सैकड़ों कर्मियों ने भाग लिया | भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा एकतरफा फैसले से किये जा रहे ट्रान्सफर को सीटू नेताओं ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 9A सपठित अनुसूची 4  का खुला उल्लंघन बताते हुए  बताया कि यह कदम घोर संयंत्र विरोधी और कर्मचारी विरोधी है जिसका दुष्प्रभाव संयंत्र के साथ साथ कर्मियों के मनोबल पर भी पड़ेगा |

ज्ञापन सौंपकर जलकर का किया विरोध
ट्रान्सफर नीति तथा सयंत्र प्रबंधन द्वारा कर्मियों के आवास पर जल कर लगाए जाने का विरोध करते हुए सीटू ने प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा |

सीटू स्थापना दिवस पर रायपुर में कार्यक्रम
प्रदर्शन के बाद भिलाई से सीटू के सैकड़ों कार्यकर्ता रायपुर के लिए रवाना हुए | सीटू के स्थापना दिवस के अवसर पर बूढा तालाब रायपुर में राज्य स्तरीय जनसभा का आयोजन किया गया जिसमे राज्य के कोने कोने से आये सैकड़ों सीटू प्रतिनिधियों ने भाग लिया | 
 




















शनिवार, 16 जुलाई 2016

सेवानिवृत्त कर्मियों का कन्वेंशन

सीटू ने किया सेवा निवृत कर्मियों का कन्वेंशन
सेवानिवृत्त कर्मियों को संगठित करने के उद्देश्य से स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा तैयार किया गया प्रस्तुति करण के साथ हिंदुस्तान स्टील एम्पलाईज यूनियन सीटू द्वारा कुर्मी भवन सेक्टर ७ में सेवानिवृत्त  कर्मियों का कवेंशन आयोजित किया गया | जिसमे बड़ी तादाद में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ साथ भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों ने भाग लिया |
सीटू ने दिया सेवानिवृत्त कर्मियों पर प्रस्तुतीकरण
स्टील  वर्कर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के उपाध्यक्ष कॉम.ब्रिजमणि चक्रवर्ती एवं संयोजक कॉम. सपन मजुमदार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया की सेल में कभी लगभग २३०००० कर्मी कार्यरत थे  जो अब घटकर मात्र ८६ हजार रह गये है अर्थात अबतक लगभग १ लाख ४६ हजार से ज्यादा कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके है लम्बे अध्यन के पश्चात सीटू ने पाया की अपने जीवन में प्राप्त किये अनुभव, कुशलता एवं नेतृत्वकारी क्षमता के बावजूद सेवानिवृत्त हो चुके कर्मी अकेलापन ,बिमारी ,आर्थिक परेशानी  से जूझते हुए समाज के अन्दर अलग थलक पड जाते है | इनके सामने बेरोजगार व् अविवाहित बच्चे एक समस्या है तो  दूसरी समस्या बैंक द्वारा लगातार कम किये जा रहे ब्याज के चलते मासिक आमदनी में हो रही कमी , बढती महगाई , चिकित्सा का बढ़ता बोझ आदि दूसरी समस्या बनी हुयी है |

आसंगठित है सेवानिवृत्त कर्मी :- सेवानिवृत्त होने के पश्चात  यह कर्मी अपनी अपनी समस्याओं से जूझते हुए अकेले एवं असंगठित रह जाते है तथा यह अलग थलक पड़ने के कारण समाज में इनकी आवाज भी नहीं रह जाती है  | इस बात को महसूस करते हुए स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया  ने  २००७ में बर्नपुर में आयोजित  अपने  रजत जयंती सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया की सीटू सभी सम्बद्ध इकाइयों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का संगठन बनाकर उन्हें संगठित करेगा जिसके तहत सीटू सभी इकाइयों में क्रमश सेवानिवृत्त कर्मियों का संगठन बना रहा है , एवं  इन संगठन के माध्यम से सेवानिवृत्त कर्मियों के मेडिक्लेम से सम्बंधित कई समस्याओं का समाधान भी निकला गया है | 
1 अक्टूबर को करेंगे पहला सम्मेलन :- हर वर्ष १ अक्टूबर को पुरे विश्व में वरिष्ट नागरिक दिवस के रूप में मनाया जाता है , १ अक्टुबर २०१३ को स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया ने कलकत्ता में बैठक कर सेवानिवृत्त कर्मियों के विभिन्न इकाईयों  में गठित संगठनों का  कोर्डिनेशन कमेटी का गठन किया | आज भिलाई में आयोजित इस कन्वेशन में सात सदस्यीय तैय्यारी समिति का गठन कर उन्हें यह जिम्मेदारी दी गयी की  भिलाई के विभिन्न सेक्टरो एवं निजी मोहल्लो में निवासरत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संगठित कर १ अक्टूबर को सेवानिवृत्त कर्मियों का पहला सम्मेलन किया जाए | सात सदस्यीय समिति में कॉम. डी. के. बेनर्जी ,राम निहोर सूरत सिंग नार ,एम्.सूर्यनारायण ,लाल सिंग ,एम्.एस.शांत कुमार , मनोहर तिवारी शामिल है |