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गुरुवार, 6 सितंबर 2018

दिल्ली हुई लाल , 5 लाख मजदूर किसान उतरे सडकों पर



दिल्ली हुई लाल , 5  लाख मजदूर किसान उतरे सडकों पर
शिक्षक दिवस के दिन मोदी सरकार को उसके वादा खिलाफी को याद दिलाते हुए मोदी द्वारा सत्ता सीन होते समय किए गए वादों को याद दिलाने एवं उन वादों को पुराना कर पाने पर आने वाली लोकसभा चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी देने के लिए देशभर के 5 लाख से ज्यादा मजदूर किसान सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया किसान सभा , अखिल भारतीय खेत मजदूर संघ के नेतृत्व में रामलीला मैदान से जंतर मंतर तक रैली निकाल कर एक विशाल सभा का आयोजन किया
 पूंजी पतियों की पिट्टू बनी केंद्र सरकार
केंद्र में सत्ता सीन मोदी सरकार पूरी तरह से पूंजीपतियों की पिट्टू बन गई है जो कि पूंजीपतियों के इशारे पर देश के अंदर मजदूरों और किसानों के खिलाफ में ऐसे ऐसे कानूनों को लेकर है जो मजदूर एवं किसान विरोधी होने के साथ-साथ  देश विरोधी एवं जन विरोधी भी साबित हुए हैं पूंजीपतियों के पैसों का इस्तेमाल करके केंद्र में सत्तासीन हुई भाजपा सरकार केंद्र सरकार की अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पिछले 4 सालों से पूंजीपतियों का एहसान चुकाने में लगी हुई है इसी का नतीजा है की वह श्रम कानूनों में 44 संशोधनों को करने के साथ-साथ पूंजीपतियों के मुनाफे को जिंदा रखने के लिए किसानों के लिए की गई जस्टिस स्वामीनाथन कमेटी के सिफारिशों को लागू नहीं करना चाहती ताकि किसानों द्वारा पैदा की गई अनाज का समर्थन मूल्य किसानों को ना देना पड़े और किसानों के द्वारा पैदा किए गए अनाज को दलालों के द्वारा औने-पौने दाम पर खरीदवा कर कर अकूत मुनाफा कमाने की खुली छूट दे सके
छात्र नौजवानों पर भी हमले हुए थे पेज
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि ना केवल मजदूर किसानों पर बल्कि छात्र नौजवान एवं महिलाओं पर भी हमले को तेज किए हैं देश के शिक्षण संस्थाओं को स्वायत्तता के नाम पर निजी हाथों में धकेल कर शिक्षा से जुड़े हुए माफिया को जहां एक तरफ विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूलने कि छूट दिया है वही हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा करने वाली केंद्र सरकार ने पकोड़ा तलने को भी रोजगार बताकर बेरोजगार नौजवानों का मजाक उड़ाया है वही देश के अंदर महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भी तेजी आई है
28 सितंबर को होगी दिल्ली में कन्वेंशन
सभा में सीटू नेता तपन सेन ने कहा कि 28 सितंबर को दिल्ली के अंदर ऑल ट्रेड यूनियन्स का कनेक्शन आयोजित किया गया है जिसमें मजदूर संगठनों के द्वारा आगामी लड़ाई की रूपरेखा तय की जाएगी एवं सभी से बातचीत करने के बाद इस कन्वेंशन में दो दिवसीय हड़ताल की भी घोषणा हो सकती है वही किसानों के द्वारा पहले से तय की गई दिल्ली  रैली को सफल बनाने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के साथ साथ अन्य दूसरे किसान सभा भी जोर शोर से तैयारियों में जुट गए हैं उस विशाल किसान मार्च के माध्यम से देशभर के किसान संगठनों के द्वारा मोदी सरकार को स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने के लिए दबाव बनाया जाएगा
राष्ट्रीय एवं स्थानीय मुद्दे एक दूसरे के पूरक
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि संघर्ष के मैदान में कोई भी मुद्दे अलग अलग नहीं होते अर्थात स्थानीय मुद्दे एवं राष्ट्रीय मुद्दे एक दूसरे के पूरक होते हैं केंद्र सरकार ने सार्वजनिक उद्योग को खत्म कर निजी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिस तरह के का खेल खेला है उसी का ही नतीजा है कि देश के अंदर 284 सार्वजनिक उद्योगों में से मात्र 9 सार्वजनिक उद्योगों का ही वेतन समझौता हो पाया है एवं 275 सार्वजनिक उद्योग अभी भी केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए एफोर्डबिलिटी क्लास  को थोप कर वेतन समझौता से मजदूरों को दूर रखना चाहती है एवं जल्द से जल्द उन सार्वजनिक उद्योगों को खत्म कर उसे औने-पौने दाम पर निजी पूंजीपतियों को सौंप देना चाहती हैं













मंगलवार, 4 सितंबर 2018

दिल्ली रैली

जनविरोधी राष्ट्  विरोधी  नीतियों के खिलाफ दिल्ली में होगा किसानों के साथ सीटू का प्रदर्शन
 सीटू के सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली रवाना
रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक 5  लाख लोग  करेंगे मार्च
वेतन समझौता पर रोक सहित सरकार की अन्य जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू द्वारा चलाए जा रहे हैं संघर्ष की श्रंखला की अगली कड़ी में 5 सितंबर को सीटू और किसान सभा  के लाख से ज्यादा लोग दिल्ली में राम लीला मैदान से  मार्च निकालकर संसद भवन के सामने प्रदर्शन करेंगे ।
निरंतर चल रहा है सीटू का संघर्ष ; 9 अगस्त को भिलाई में 238 लोगों ने दी थी गिरफ्तारी
सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू का संघर्ष निरंतर जारी है | अपने उद्योग और कर्मियों तथा आम जनता के हितों की रक्षा के लिए  सीटू द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है | स्थानीय स्तर पर कन्वेंशन, प्रदर्शन, परिवार सहित धरना, दिल्ली के जंतर मंतर पर एक दिवसीय धरना; 9,10 एवं 11 नवंबर 2017 को संसद के सामने महापड़ाव  का आयोजन,| 9 अगस्त 2018 को देशभर में सामूहिक गिरफ्तारी, स्वतंत्रता दिवस  की पूर्ण  रात्रि 14 अगस्त को सामूहिक जागरण के पश्चात अब 5 सितंबर को दिल्ली में किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन ।छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम दास जी टंडन के आकस्मिक निधन के कारण छत्तीसगढ़ में सामूहिक जागरण के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था | भिलाई में यह कार्यक्रम अब भगत सिंह जयन्ती के अवसर पर 28 सितम्बर  2018  को होगा |
नीतियों के आक्रमण और आम जनता के शोषण पर एक नजर
1.        इस्पात उद्योग पर संकट- लागत मूल्य से कम कीमत पर इस्पात का आयत, उच्च परिवहन शुल्क, उच्च बिजली दर, विभिन्न प्रकार के उपकर, भारत  में इस्पात की निम्न प्रति व्यक्ति खपत(62कि.ग्रा.प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ) के कारण इस्पात उद्योग संकट में है |
2.        वेतन समझौता में बाधा- प्रधानमंत्री कैबिनेट द्वारा DPE के माध्यम से जारी  सार्वजनिक उपक्रमों के  वेतन समझौता करने के जारी निर्देश
·        विगत 3 वर्षों में  लाभ अर्जित करना आवश्यक है ।
·        3 वर्षों के पश्चात समझौते की समीक्षा कर लाभ ना होने पर वेतन की वसूली (Recovery)
·        वेतन वृद्धि की अधिकतम सीमा विगत 3 वर्षों के औसत लाभ का 20% होगी ।
·        सेल पेंशन योजना पर 4 वर्ष पूर्व हुए समझौते को लागू करने के लिए लाभ कमाने की योजना प्रस्तुत करनी है।
3.                       दवाओं की मूल्य वृद्धि - सूचीबद्ध दवाओं को 140 से घटाकर 70 कर दवा निर्माताओं को  अकूत मुनाफा कमाने की छूट दी गयी । गैर सूचीबद्ध दवाओं में शामिल जीवन रक्षक दवाएं  मूल्य नियंत्रण से बाहर है।
4.                       योजना आयोग को भंग कर NITI आयोग का गठन- सरकार ने भारत रूपांतरण के नाम पर योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन किया और 74 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विनिवेशीकरण बेचने का निर्णय लिया । सेल की टाउनशिप तथा विशेष इस्पात संयंत्र के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू ।
5.                       PPP मॉडल एक साजिश- सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत सरकारी उपक्रमों सहित अस्पताल आदि में सरकार पूँजी   निवेश करके, प्रबंधन निजी हाथों को सौंप रही है ।
6.                       निजी मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति- सस्ती भूमि और रियायतें देकर नीति आयोग द्वारा निजी कारोबारियों को मेडिकल कॉलेज खोलने प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।
7.                       भारतीय चिकित्सा परिषद(MCI) के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का गठन प्रस्तावित है जिसका उद्देश्य जनता के स्वास्थ्य के लिए उचित चिकित्सा पद्धत्ति सुनिश्चित करने वाली इस संस्था में निजी कारोबारियों के चहेतों को नामित किया जा सके ।
8.                       भविष्य निधि भविष्य निधि के बाद अब ई.एस.आई. और श्रमिक कल्याण कोष को भी शेयर बाजार निवेश किया जाएगा
9.                       ठेका कर्मियों का अमानवीय शोषण- न्यूनतम  मजदूरी अधिनियम,  बोनस भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि कानून, साप्ताहिक अवकाश अधिनियम, समान कार्य के लिए समान वेतन  जैसे वर्तमान श्रम कानूनों  का सही अनुपालन नहीं होने से ठेका कर्मी पहले से ही अमानवीय शोषण के शिकार है। आउटसोर्सिंग के बाद अब वे ठेका कर्मी नहीं रह पाएंगे और सभी कानूनी अधिकारों से वंचित हो जाएंगे ।
10.                  Fixed term employment (निश्चित अवधि  रोजगार) – नियमित रोजगार को खत्म करने के लिए निश्चित अवधि रोजगार लाया जा रहा है ताकि पूर्व निर्धारित अवधि के पश्चात बिना किसी मुआवजे के नौकरी से हटाया जा सके ।
11.                  किसानों को नहीं मिल रहा अपनी उपज का समर्थन मूल्य - स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों को उनकी उपज के लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की चुनाव पूर्व घोषणा पर सरकार मौन है ।
12.                  बीमा आधारित योजनाएं- फसल बीमा योजना तथा स्वास्थ्य योजनाएं वास्तव में बीमा आधारित योजनाएं हैं जिससे निजी बीमा कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है और किसानों की आत्महत्या जा रही है
13.                  बैंक संकट- बड़े ऋणधारियों द्वारा ऋण नहीं चुकाने से बैंक कर्मियों का वेतन समझौता रुका | IDBI बैक के शेयर को LIC को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है |
14.                  नोटबन्दी कालेधन पर प्रहार के नाम पर की गयी नोट्बंदी वास्तव में आम जनता की रोजी-रोटी पर हमला था |यह बात हाल ही में जारी हुयी रेज़र्व बैंक की ताजा रिपोर्ट से स्पष्ट हो गयी |  
15.                  जीएसटीसरकार द्वारा जीएसटी के माध्यम से आम जनता पर कर का बोझ थोपने के उदाहरण है पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखकर एवं दवाओं को जीएसटी के दायरे में रखना |

नीतियों से पीड़ित समाज का हर तबका कर रहा है संघर्ष
उक्त नीतियां सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर लागू की जा रही जनविरोधी नीतियों मे से कुछ उदाहरण है जिससे समाज का हर तबका पीड़ित है। समाज के हर तबके की आजीविका पर नीतियों का हमला हो रहा है अपनी आजीविका बचाने के लिए किसान सफाई कर्मी शिक्षाकर्मी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा बहनों बैंक कर्मी BSNL के कर्मी ग्रामीण डाकघर में विभिन्न उद्योग के कर्मचारी परिवहन कर्मचारी यहां तक कि पुलिस कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को भी सड़क पर  उतरना पड़ रहा है ।

                                                जनहित में बनानी होगी नीतियाँ
बड़े कारपोरेटर घरानों को करों में दी गई छूट वापस ली जाए , बैंको में रखे जनता के पैसों की लूट पर रोक लगे, स्थायी कार्यों का ठेकाकरण बंद हो, समान  कार्य के लिए समान वेतन मिले, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले,सार्वजानिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगे, सभी नागरिको के लिए खाद्य सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा,पेयजल व आवास  सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाए |






रविवार, 6 मई 2018

सेक्टर 9 ब्लड बैंक बंद करने की साजिश का विरोध

दो लाख लोगों को नहीं मिलेगा इलाज – सीटू  
सेक्टर 9 हॉस्पिटल का ब्लड बैंक निलंबित होने से पूरे क्षेत्र में विशेष रूप से संयंत्र कर्मियों के लिए गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी | 840 बेड वाले इस अस्पताल में भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करने वाले लगभग 25000 श्रमिक तथा उनके आश्रितों तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को मिलाकर दो लाख लोग इलाज करवाते हैं | इन सारे मरीजों को किसी ने किसी बीमारी या दुर्घटना के इलाज के लिए रक्त की जरूरत होती है |  पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे बढ़िया उत्कृष्ट सुविधा से युक्त ब्लड बैंक सेक्टर 9 अस्पताल में ही स्थापित है,  जिसे अज्ञात कारणों से निलंबित करने का आदेश आने की आशंका है | निलंबन की स्थिति में डेढ़ लाख लोगों का इलाज प्रभावित हो जाएगा |
संक्रमण को नहीं दस्तावेज के लिए किया जा रहा निलंबन
प्राप्त सूचना के अनुसार  यह आदेश धारा 122 के तहत निकाला गया है |  जिसके अनुसार बचे हुए रक्त या उपयोगिता की समय सीमा समाप्त होने के बाद बचे हुए रक्त के दस्तावेजों के संबंध में अनियमितता को आधार बनाया गया है | ज्ञातव्य हो कि इस प्रकार की सूचना किसी भी ब्लड बैंक में उपलब्ध होने की जानकारी नहीं मिली है |
राज्य तथा केंद्र समिति के अनुशंषा से ब्लड बैंक का लाइसेंस अगस्त 17 में हुआ था रिन्यू
राज्य तथा केंद्र सरकार की दो समितियों की जांच तथा अनुशंसा के बाद सेक्टर 9 हॉस्पिटल ब्लड बैंक का लाइसेंस अगस्त 2017 में रिन्यू किया गया था | इस दौरान इस प्रकार के किसी दस्तावेज की न तो मांग की गयी थी और ना ही दस्तावेजों पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति की गयी थी | इस मामले को तूल देकर भिलाई इस्पात संयंत्र के सर्वसुविधायुक्त अस्पताल में से ब्लड बैंक की सुविधा को खत्म करने की साजिश के पीछे बड़ी बड़ी राजनीतिक शक्तियों के लगे होने की आशंका जताई जा रही है |

संयंत्र कर्मियों को होगा 100 करोड़ का आर्थिक नुक्सान
इस ब्लड बैंक के बंद होने से निराधार हो जाने वाले लाखों संयंत्र कर्मियों और उनके परिवार के आश्रितों को अपने इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ेगा | औसतन हर संयंत्र कर्मी के परिवार के सदस्यों को इलाज या किसी अन्य कारणों से अस्पताल की सेवाएं लेनी पड़ती है इस आधार पर अगर प्रति व्यक्ति औसत खर्चा ₹5000 भी लगाया जाए तो 100 करोड रुपए का आर्थिक नुकसान संयंत्र कर्मियों तथा उनके आश्रितों को होने वाला है |

निजी अस्पतालों को होगा 100 करोड़ का फायदा
यह पूरा का पूरा 100 करोड़ निजी अस्पतालों में जाएगा | भिलाई इस्पात संयंत्र के आसपास के क्षेत्र में बने हुए अस्पताल आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं | उनमें से कई अस्पतालों को बेचा जा चुका है | निजी अस्पताल भिलाई इस्पात संयंत्र में संचालित होने वाले सेक्टर 9 अस्पताल की गुणवत्ता को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं | उनके लिए यहां पर इलाज कराने वाले कर्मियों और उनके आश्रितों के रूप में एक बड़ा बाजार उपलब्ध है |वे इसपर नजर लगाए हुए हैं और उनकी जेब से पैसा निकालने की तकनीक खोज रहे हैं | इसी के तहत एक अजीब से कारण को आधार बनाकर भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लड बैंक को निलंबित किया गया है |

छत्तीसगढ़ में संक्रमण के कुल 536 से ज्यादा मामले किसी ब्लड बैंक पर नहीं हुई कार्यवाही
छत्तीसगढ़ में HIV तथा इसी प्रकार के संक्रमण के 536 मामले पूरे छत्तीसगढ़ के अलग-अलग ब्लड बैंक में सामने आ चुके हैं | इनमे से किसी भी ब्लड बैंक की जांच की बात सामने नहीं आई है | यहाँ तक कि किसी एक भी ब्लड बैंक का लाइसेंस निलंबित नहीं हुआ है|  

मामला दो साल पुराना : जांच में नहीं मिले पुख्ता तथ्य
इस पूरे प्रकरण में जो दुखद घटना घटित हुई वह सन 2015 में हुई थी और 2015 से लेकर 2017 तक के बीच में किस किस स्थान पर संबंधित मरीजों ने रक्त चढ़ाया या किसी प्रकार की इंजेक्शन की उपयोग किया है यह भी ज्ञात नहीं है और संक्रमण की संभावना और जगहों से होने की बात पर किसी प्रकार के दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है | रक्तदाता के रक्तदान के समय संक्रमित होने के भी कोई प्रमाण नहीं हैं | इन सबके बावजूद केवल इस आधार पर ब्लड बैंक का निलंबन किया जाना किसी तरह से गले नहीं उतरता है |

दो महीने के विंडो पीरियड में नहीं होती पुष्टि 
रक्त संक्रमण का एक विंडो पीरियड होता है | यह एक से तीन महीने तक का हो सकता है | इस विंडो पीरियड में HIV तथा इसी प्रकार के संक्रमण संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पाती है यह सभी ब्लड बैंकों में दस्तावेजी रूप में उपलब्ध होता है | दुर्भाग्यवश जब ऐसा रक्त जिसमे संक्रमण की पहचान नहीं हो पाई हो किसी पीड़ित मरीज के शरीर में चढ़ाया जाता है तो संबंधित डॉक्टर या ब्लड बैंक दोनों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि यह संक्रमित है और ना ही उस जानकारी को प्राप्त करने का कोई माध्यम है कि यह ब्लड संक्रमित है | ऐसी स्थिति में डॉक्टर के द्वारा या ब्लड बैंक के द्वारा उस रक्त को मरीज के लिए जीवन रक्षक के रूप में उपलब्ध कराया जाना स्वाभाविक है |

विंडो पीरियड में संक्रमित रक्त की पहचान सम्भव नहीं
पूरे छत्तीसगढ़ में किसी भी ब्लड बैंक में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है कि विंडो पीरियड में संक्रमित रक्त की पहचान की जा सके | ऐसी स्थिति में अगर भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थित सेक्टर 9 हॉस्पिटल का ब्लड बैंक निलंबित किए जाने की स्थिति में है तो पूरे छत्तीसगढ़ में कोई भी ब्लड बैंक इस आवश्यकता को पूरा नहीं करता है | अतः सारे ब्लड बैंक इस तथ्य के आधार पर निलंबित किए जाने की स्थिति में है, लेकिन उन सारे ब्लड बैंकों पर कोई कार्यवाही न करते हुए केवल सेक्टर 9 के ब्लड बैंक पर कार्यवाही किया जाना कई प्रकार के संदेह को जन्म देता है  |

संयंत्र में बड़ी दुर्घटना हुई तो इलाज के अभाव में बेमौत मरेंगे संयंत्र कर्मी
भिलाई इस्पात संयंत्र एक बेहद संवेदनशील जगह है, जहां पर विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाएं होती रहती हैं | जिनमें स्थाई तथा अस्थाई दोनों प्रकार के श्रमिकों के घायल होने की संभावना रहती है | ऐसे किसी भी घायल श्रमिक को तत्काल सेक्टर 9 अस्पताल में पहुंचाया जाता है और वहां उपलब्ध ब्लड बैंक से तत्काल रक्त की उपलब्धता हो जाती है जिसके चलते उनकी जान बच सकती है |
ब्लड बैंक बंद हुआ तो कर्मियों के परिवार हो जायेंगे कंगाल
लेकिन अगर ब्लड बैंक बंद हो गया तो ऐसी स्थिति में न तो उसे सेक्टर 9 अस्पताल में भर्ती किया जा सकेगा और ना ही उसका इलाज संभव हो सकेगा | उसे चंदूलाल चंद्राकर हॉस्पिटल में भेजना पड़ेगा जहां पर उपलब्ध ब्लड बैंक में इतनी बड़ी मात्रा में ब्लड उपलब्ध नहीं रहता है या फिर उसे दुर्ग स्थित सरकारी अस्पताल में भेजना पड़ेगा या सुपेला के सरकारी अस्पताल में भेजना पड़ेगा जहां पर ब्लड प्रदान करने की तथा इस प्रकार की दुर्घटनाओं के लिए विशेषज्ञों की उपलब्धता 24 घंटे नहीं हो पाती है | ऐसी स्थिति में संयंत्र कर्मी बेमौत मारा जाएगा |  उसके बचने की संभावनाएं तो कम होगी ही साथ में उसका मेडिकल बिल जो कि लाखों में भी हो सकता है उस कर्मचारी के परिवार को देना पड़ सकता है |  ऐसी स्थिति में भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्य करने वाले कर्मचारी किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक तंगहाली के चलते आत्महत्या की स्थिति तक पहुंच जाएगा |
साजिश के  तहत शनिवार को दिया नोटिस
शनिवार होने के कारण अस्पताल का प्रशासनिक कार्यालय केवल डेढ़ बजे तक खुला रहता है | इसकी जानकारी होने के बावजूद दोपहर 3 बजकर पांच मिनट पर ब्लड बैंक में नोटिस चस्पा कर सील करने की कार्यवाही किसी बड़ी साजिश का हिस्सा दिखाई देता है | शनिवार का समय चुनने के पीछे का कारण शनिवार और रविवार दोनों दिन किसी भी प्रकार आ कदम न उठा पाना है | सीटू ने इस पूरे प्रकरण में गहरी साजिश की संभावना जताई थी जो अब सच साबित होती नजर आ रही है | 28 तारीख को जारी पत्र अस्पताल को नहीं मिलता है और पूरे दस दिनों तक whatsapp में घूमता है , जबकि किसी सरकारी आदेश को जारी होने के पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता है | यह जांच का विषय है कि यह दस्तावेज किसके फायदे के लिए सार्वजनिक किया गया |
मरीजों ने हस्पताल छोड़ना चालू किया
सेक्टर 9 में डिलीवरी के लिए दाखिल हुए पुलिस अधिकारी शैलेन्द्र सिंह चौहान की पत्नी को सीजर होने की स्थिति में ब्लड की अनुपलब्धता के कारण दुसरे हॉस्पिटल में भेजा गया | एक संयंत्र कर्मी की थैलेसिमिया से पीड़ित पुत्री को एक बजे एक बोतल ब्लड चढ़ाया गया था , उसे दूसरा ब्लड शाम सात बजे चढ़ाना था लेकिन ब्लड बैंक बंद होने के कारन उसे ब्लड नहीं चढ़ाया जा सका | अब किसी भी गंभीर परिस्थिति में निजी चिकित्सालय में ले जाने की मजबूरी बन गयी है |
सीटू ने जताया विरोध
सीटू ने ब्लड बैंक बंद किये जाने का विरोध करने के लिए सेक्टर 9 हॉस्पिटल के सामने प्रदर्शन किया | यह प्रदर्शन तथा विरोध निलंबन वापस लेने तक लगातार जारी रहेगा |





फोटो सौजन्य - कॉमरेड इश्वर पटेल












फोटो सौजन्य - कॉमरेड टी. जोगाराव